कविता : खुद को पहचानो....
फिजूल बेकार की बातों को
मानने में लगे हो
कौन भला कौन बुरा है क्यों ये
जानने में लगे हो ?
इस बात को जरा
ध्यानपूर्वक मानो
दूसरों को जानने के बजाए
खुद को पहचानो
जब अपने अंदर सूक्ष्म
तरीके से दिख पाओगे
ये जीवन वास्तव में क्या है ?
खुद ही जान जाओगे
ये जीवन वास्तव में क्या है ?
खुद ही जान जाओगे.......
netra prasad gautam


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







