मैं तुम्हें कितना चाहता हूँ,
तुम्हारे लिए क्या क्या कर जाता हूँ,
एक खालीपन में क्या शौक लिए बैठा हूँ,
खाली पन्ने भी भर जाता हूँ,
तुम्हारी मुस्कान अब मैं अपने होठों पर भी चाहता हूँ,
जहाँ तुम नज़र आती हो सम्भल के गिर जाता हूँ,
मैं वो होश रोज गंवाता हूँ,
तभी तो तुमसे मिलना चाहता हूँ,
तुम ना ही कर दो तो,
मैं भी अपने ज़ख्म भरने लग जाता हूँ,
उदास नहीं हूँ,
बस अपने पहले वाले अतीत शख़्स से बहुत डर जाता हूँ,
क्या कहेगा वो मुझे मैं कि अधूरे इश्क़ में,
मैं आँखों को पानी कर जाता हूँ,
आज जो हूँ मैं बचपन वाले को शैतान लगूंगा,
इसलिए बिना बताये दिल को मैं,
साँसें चलते चलते मर जाता हूँ!!
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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