अपनेपन की लकीर
जो ख़ास होते हैं ,
उनके दिए ग़मों में भी ख़ुशी ढूँढ लेना।
हज़ारों की महफ़िल में उनकी ख़ामियों का ज़िक्र कर,
कभी मज़ाक़ न बनाना।
अनजानों की महफ़िल में,
अपनेपन की लकीर बनाए रखना।
वन्दना सूद
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







