सन्नाटे में सारी शामें बिता दी,
वो पास थे और दूर की खबर सुनाते रहें।
तुमसे कहनी थी वो बातें,
जब मुस्कुराना, रोना और देखना,,
मैं वहाँ फिर छुपता रहा।
काली मेघा के बीच उदासी आ जा रही थी,
बारिश की कमी क्यूँ लगी,
तुम्हारी याद आ रही थी।
तुमने इतना कहा उस गगन में उन खुलती हवाओं में,
बारिशों में खुले बालों से,
तुम दूर जाने का रस्ता ढूंढ लेते हो।
मैं पल से पल के बीच,
तुम्हें भूलता हूँ,
तुम्हें पल पल याद करूँ इसलिए,
तुम्हें भी हर दम कुछ नया पसंद है,
तुम्हें भी नया करूँ इसलिए।
अब ये पूछो की,
मैं इश्क़ का क्या करूँगा,
इश्क़ इस तरह के सवाल से,
मेरे तेरे मिजाज तक,
वापसी के रस्ते नहीं रखता ,
इश्क़ से सनम कुछ होगा नहीं,
होगा भी कभी तो इतना वक़्त होगा नहीं,
अकेले से जिन्दगी बिताई नहीं जाती,
और अकेली जिंदगी है। ।
ये दुनिया की रीत ही तो ऐसी है कि,
"मनुष्य की आवाज को तुम गीत बना देते हो "
"गीत गुजर जाएगा, वो किसी की बातें नहीं गुज़रती "
"लोगों के कानों में सदियों का मेल जमा है"
"सबसे मधुर शब्द है हाँ, पर सबसे अधिक असर करेगा ना"
- ललित दाधीच।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







