हिंदू संस्कृति भूले पाश्चात्य संस्कृति को अपनाते हो।
जनवरी अपना नववर्ष नही फिर भी क्यों मनाते हो।
चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि आती हो।
अपना नूतन वर्ष जब विक्रम संवत की शुरुवात हो।
इस दिन सृष्टि रचना ब्रह्म द्वारा व उम्मीदें अपार हो।
खुशियां जीवन में आए सुख समृद्धि का भंडार हो।
हिंदू संस्कृति भूले पाश्चात्य संस्कृति को अपनाते हो।
जनवरी अपना नववर्ष नही फिर भी क्यों मनाते हो।
वैदिकधर्म सनातन अपना क्यू संस्कृति को भूले हो।
बारह हजार वर्ष सबसे पुराने इतिहास को भूले हो।
जो मानव उत्पति से पहले वर्णाश्रम धर्म जाना हो।
सनातन संस्कृति पर फिर तुम क्यों दाग लगाते हो।
हिंदू संस्कृति भूले पाश्चात्य संस्कृति को अपनाते हो।
जनवरी अपना नववर्ष नही फिर भी क्यों मनाते हो।
जिस दिन प्रकृति द्वारा अपना नूतन श्रंगार होता हो।
हां सूरज का चक्कर धरती उस दिन पूरा करती हो।
जब विक्रमादित्य ने संवत को व्यवस्थित किया हो।
हा जिसे नवसंवत्सर के नाम से भी जाना जाता हो।
हिंदू संस्कृति भूले पाश्चात्य संस्कृति को अपनाते हो।
जनवरी अपना नववर्ष नही फिर भी क्यों मनाते हो।
-सत्यवीर वैष्णव बारां राजस्थान


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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