तुम इक बात बताओ,
ग़म के साए से दूरियाँ हटाओ,
मोहब्बत के माहौल को देखना,
मिला नहीं दुबारा कभी,
अब जिसको अपना हाथ सौंपे हो,
उससे शक के बादल हटाओ,
नहीं करनी है मोहब्बत तो चुप हो जाओ,
किसी के बिखरे आँसू पर,
अपनी हँसी के चादर ना बिछाओ,
मुलाकातें अब मुश्किल ही लगती हैं इतनी,
तो अपनी बातें भी ले जाओ,
मालिक को सारा क़ुसूर देकर इतने ना इतराओ,
पहले खुद के बलबूते अपनी साँसें तो ले आओ,
किसी के बिछौने पर बैठकर,
अपनी गंदगी ना कर जाओ। ।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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