उसकी रहमत से
लंबी रातों से गुजरकर,
हर दिन एक नया सवेरा मैं पाता हूँ।
जगाकर उसके मन में उम्मीद,
हर बार
एक नया दिन मैं जीत जाता हूँ।
बचपन बिताया, यौवन गँवाया,
बेहिसाब साँसें पाकर भी
मैं खुद को निखार न पाया।
काम, क्रोध, लोभ, मद, मोह में उलझकर
मैं खुद को उभार न पाया।
फिर भी उसकी रहमत देखो
हर रोज़ मुझे अँधेरे से उजाले में ले जाता है,
देकर एक नया दिन
फिर मुझे सँवरने का मौका देता है।
मैं सपनों की अपनी ही एक दुनिया बनाता हूँ,
जहाँ मनमाने ढंग से जीता हूँ।
कर्मों को खेल समझकर,
वक्त को अपनी मुट्ठी में भरना चाहता हूँ।
कोई ठोस वजह नहीं मेरे जीने की,
फिर भी उसकी रहमत देखो
हर दिन एक नया सवेरा मैं पाता हूँ।
वन्दना सूद
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







