कभी-कभी
शब्द होंठों तक आकर
ठिठक जाते हैं,
जैसे शाम की आख़िरी किरण
अंधेरे से डर गई हो।
तुमसे कहना था बहुत कुछ,
पर खामोशी ने
मेरी उँगलियों को थाम लिया,
और मैं बस देखता रह गया
तुम्हारी आँखों में उतरती हुई
वह अनसुनी सी बेचैनी।
कुछ बातें
काग़ज़ पर नहीं उतरतीं,
वह दिल की तहों में
धीरे-धीरे जमती हैं
जैसे ओस
किसी अनजान पत्ते पर।
तुम चली गईं,
पर वह अधूरी बात
अब भी यहीं है—
मेरे और तुम्हारे बीच
एक अनकहा पुल बनकर,
जिस पर हम कभी
साथ चल नहीं पाए।
शायद
हर कहानी को
अंत की ज़रूरत नहीं होती,
कुछ किस्से
बस महसूस किए जाते हैं—
बिना कहे,
बिना सुने।
और मैं आज भी
उसी अधूरी बात के साथ
जी रहा हूँ,
जहाँ तुम नहीं हो,
पर तुम्हारी ख़ामोशी
अब भी मेरे शब्दों से
ज़्यादा बोलती है।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







