अनुपस्थिति
नहीं, तुम नहीं हारोगे।
लोग मुझे हरा सकते हैं,
क्योंकि इंसान नफरती है।
एक झूठ के लिए
अपनी मुँह की लार को क्यों चोट देना?
सच जताने के लिए
इतना भी बेबस नहीं हूँ।
शब्द, भाव, पेश करना -
ये इंसान है ही नहीं।
जीवन, मृत्यु,
विचार, मन, आत्मा,
चेतना, बुद्धि, तंत्रिका तंत्र,
चाह, दिल, साँस,
सोच, नज़र, उपस्थिति -
इनमें भी इंसान है ही नहीं।
कुछ भी लिख दोगे
तो भी इंसान वो नहीं है।
"अनुपस्थिति ही इंसान है।
जहाँ भी अनुपस्थिति है,
वहीं ईश्वर है,
और वहीं इंसान है।"
राख उसकी है जिसे कोई और छू रहा है, कहाँ है वो जिसे राख होने पर भी बहा दिए, ये नजरों से हटाना ही तो है।
अनुपस्थिति स्वयं हर रूप में उपस्थित होकर देख रही है कि,
वो अनुपस्थित रूप में किसी तरह उपस्थित है या नहीं,
लेकिन वह रूप उपस्थित होने पर अनुपस्थिति हमें उपस्थित लगती है,
अब मनुष्य के पास एक अस्तित्व ही है,
लेकिन मनुष्य उस मनुष्य से नहीं मिला जो अस्तित्व है,
तब ये रूपों में आप मैं खोज रहे हो,
खोजने वाला खोज में अपनी खोजों में खोज रहा कि,
वो है लेकिन जहां खोजें रूप कि उपस्थिति है,
अतः एक दिन वह अनुपस्थित हो जाता है,
कि यहीं उसका अस्तित्व है जो उपस्थित है।
मनुष्य अलग होकर खुद नहीं देख सकता ,
तो आप ये नहीं में हां की अनुपस्थिति,
और हाँ में नहीं उपस्थिति क्यों ला रहे हो,
आप सभी को एक उत्तर चाहिए,
कोई भी प्रश्न से प्रेम नहीं करेगा,
क्योंकि वहां वो अनुपस्थिति दर्शाएगा,
इसलिए मैंने कहा इंसान नफरती है,
मुझे दिखाई देगी आप अपने लिए उत्तर खोज रहे हो,
क्योंकि प्रश्न कितना करोगे,
वहाँ क्यों अपनी अनुपस्थिति रखते हो।
मैं कौन हूँ प्रश्न नहीं है इंसान की नफरत है।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







