अधूरी नज़्म (नज़्म)
कल से एक अधूरी नज़्म लिखे बैठा हूं
बात है इसमें कुछ मेरी और कुछ तुम्हारी
अपनी सारी बातें मैंने लिख रखी हैं
कैसे काटी मैंने बिन तेरे सब रातें
किनसे करता था मैं अक्सर तन्हा बातें
कैसे सूनी दीवारों को तकता था मैं
मन ही मन फिर जाने क्या-क्या बकता था मैं
इस जुदाई में मुझपर क्या-क्या बीता है
सच कहूं तो एक-एक पल भारी बीता है
तेरे सपने, तेरी चाहत, उफ्फ ये मोहब्बत, उफ्फ ये आफ़त
कैसे जैसे-तैसे मैंने ये दिन काटे
इसके बाद की लाइनें मैंने छोड़ रखी हैं
आओ आकर इस नज़्म को अब मुक्कमल कर दो।
अनमोल


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







