एक जद्दोजहद है, कि आदमी हो जाएं..
कभी आसमां तो, कभी ज़मीं हो जाएं..।
बाद में वक्त, झरोखों से झांकने देगा नहीं..
दिल चाहे कुछ कहे, चलो हम हमीं हो जाएं..।
माहताब कुछ और ठहर, तेरी तासीर में ये फिज़ा..
चांदनी-ओ-शब से मिलकर और शबनमी हो जाएं..।
हमारी हंसी पर भी, उनको एतराज़ मालूम होता है..
उनकी रज़ा है इसी में, तो चलो कुछ मातमी हो जाएं..।
उनके वादे और इरादे, हर दफ़ा जुदा ही निकले हैं..
चलो अब हम भी उनकी तरह कुछ मौसमी हो जाएं..।
पवन कुमार "क्षितिज"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







