वक्त को रुक कर आँसू बहाने थे पर निकलता गया,
ये जिंदगी थी हकीकत की पर नसीब का चेहरा सबकुछ निगलता गया,
आसमान पूरा खुला था पर बंदिशों के सहारे सारी ऊँचाई चढ़ता गया,
ये मैं नहीं सारा जहां अपने अंदर होते देखता है,
ना जाने किसकी जिंदगी है,
कोई जीना चाहता था,
पर कोई जीने के लिए मरता गया।
माना जिंदगी है पर जिंदा नहीं रखती,
जीने के लिए जिंदा रहना पड़ता है,
जीना चाहते हैं तो सुनसान सब्र से गुजरना पड़ता है,
फिर अपनेपन अपने हिसाब का जीना चाहते हैं,
तो जिद्दी जुनून भागना पड़ता है।
जिंदगी तुम्हें सिर्फ साँसें और उसका ठिकाना देगी,
बाकी उन साँसों को जिंदा तुम्हें रखना है,
उनमें साँसे तुम्हें भरनी होगी,
उन्हीं साँसों को तुम्हें जिंदा रखना है,
जिंदगी की प्रत्येक साँस एक प्रतिक्रिया है,
लेकिन तुम उनकी गति विध्वंस आगे बढ़ती पहली क्रिया हो।
"नसीब होता तो उसे भी हमारी याद आती,
कोई दवा देता तो वो दुआ बन जाती,
जिंदगी इतनी आसान होती ना तो,
कोई माँ ये ना देखती कि उसके लड़की हुई कि लड़का,
इतनी पास होती जिंदगी तो ये जिंदगियां इतनी दूर तक नहीं जाती।"
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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