अगर कभी मिला मौक़ा, तो अपना हाल लिखूँगा,जो सहता रहा चुपचाप, वो सवाल लिखूँगा।
चेहरे पे मुस्कान रखकर दुनिया को बहलाया,अंदर जो टूटता रहा, वो बवाल लिखूँगा।
सबको लगा कि मुझको कोई दर्द ही नहीं,
काग़ज़ पे अपनी ख़ामोशी का कमाल लिखूँगा।
जो अपने थे, वही जब रास्ते में छोड़ गए,
उनके दिए हर ज़ख़्म का हिसाब लिखूँगा।
और जब कोई पूछेगा—“तू इतना चुप क्यों है?”
मैं हँसकर कहूँगा—“कुछ नहीं”… फिर पूरा ख़्वाब लिखूँगा।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







