कितना पानी छुपा आँखों में जानकर क्या करोगे।
अधूरी ख्वाहिशों में सच समाया जानकर क्या करोगे।।
कौन सही कौन गलत अनुमान अपना अपना रहा।
दुसरों पर उँगली उठाने की फितरत जानकर क्या करोगे।।
खुद को भी कभी परख कर देखना अनजान हो।
दूर से कितना साफ दिखता इसको जानकर क्या करोगे।।
पास जाकर ही सच का अनुभव मिलेगा 'उपदेश'।
हर चेहरे की पीछे राज दास्तान को जानकर क्या करोगे।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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