(बाल कविता)
सब पर रौब जमाता पैसा
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बिगड़े काम बनाता पैसा ।
सब पर रौब जमाता पैसा ।।
दुनिया भर में इसका जलवा
रोज़ खरीदो खाओ हलुआ
सोना चांदी हीरा मोती
सबके जीवन की ये ज्योती
नहीं किसी को दिक्कत होती
सब कुछ लेकर आता पैसा ।
सब पर रौब जमाता पैसा ।।
जो मर्जी हो इससे ले लो
खाओ मौज उड़ाओ खेलो
पैसे वाले कभी न रोते
मीठे सपनों में हैं खोते
ख़र्च फालतू कभी करो मत
मेहनत से है आता पैसा ।।
सब पर रौब जमाता पैसा ।।
भूखे को भोजन करवाओ
मजबूरों का साथ निभाओ
लेकिन कभी नहीं इतराओ
अहंकार न दिल में लाओ
जीवन में सुख वैभव भी तो
सबको सदा दिलाता पैसा ।
सब पर रौब जमाता पैसा ।।
मित्र सभी इसके बन जाते
आगे पीछे पूंछ हिलाते
सारे जग को नाच नचाए
मेहनत भी सबसे करवाए
कठिन परिश्रम करने वाला
घर में हरदम लाता पैसा ।
सब पर रौब जमाता पैसा ।।
लेकिन चोरी कभी न करना
बेमानी का धन मत रखना
ठग कर पैसा कभी न लाना
सूझ-बूझ से सदा कमाना
गलत राह से आता है जो,
घर में कलह कराता पैसा ।
सब पर रौब जमाता पैसा ।।
~राम नरेश 'उज्ज्वल'


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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