वह शहर - आज क्यों ... वीरान बहुत है !
कल जो फूलों सा खिलखिलाता था !!
आज वह जाने क्यों ..बियाबान बहुत है !
कुछ तो हुआ होगा इस शहर मे ..ए ख़ुदा
कल तक जो बेफ़िक्र थे वे परेशां ..बहुत है !!
----कुसुम काव्यांश

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Show your love with any amount — Keep Likhantu.com free, ad-free, and community-driven.
The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
वह शहर - आज क्यों ... वीरान बहुत है !
कल जो फूलों सा खिलखिलाता था !!
आज वह जाने क्यों ..बियाबान बहुत है !
कुछ तो हुआ होगा इस शहर मे ..ए ख़ुदा
कल तक जो बेफ़िक्र थे वे परेशां ..बहुत है !!
----कुसुम काव्यांश
© 2017 - 2026 लिखन्तु डॉट कॉम