"RLSY की यादें"
छूट रही है आज हमसे,
RLSY की ये अपनी दुनिया,
भीग रही हैं आज,
अलविदा की इस घड़ी में,
हमारी ये नम पलकें।
आँखों में नमी है
और दिल में एक अजीब सा शोर है,
RLSY कॉलेज में हमारी कहानी का,
अब ये आखिरी छोर है।
2024 में एक अनजानी डगर पर,
हम सबने कदम बढ़ाया था,
2026 का ये साल,
न जाने कब,
विदाई का संदेश ले आया।
इस चौखट से जो विदा हो रहे,
तो कलेजा फट रहा है,
RLSY कॉलेज का एक-एक लम्हा,
आँखों के आगे तैर रहा है।
सोचा न था अपने महाविद्यालय से,
ऐसे दिल भारी करके जाना होगा,
कल से इस हँसती हुई महफ़िल का,
सिर्फ एक अफ़साना होगा।
तस्वीरें तो बहुत होंगी मोबाइल में,
पर ये नज़ारा कहाँ से लाएँगे,
जब भी आएगी RLSY की याद,
हम छुप-छुप कर आँसू बहाएँगे।
हमारे प्रोफ़ेसर्स ने सिर्फ सिलेबस नहीं,
जीना सिखाया है,
जब भी हम लड़खड़ाए,
उन्होंने हमेशा अपना हाथ बढ़ाया है।
उनकी गंभीर बातें,
उनका वो प्यार से हमें,
सही राह दिखाना,
बहुत याद आएगा सर,
आपका वो हँसते-हँसते हमें समझाना।
बिछड़ जाएँगे हम सब,
ढूँढने अपनी मंज़िलें नई,
पर इस कॉलेज जैसी ज़िंदगी,
फिर मिलेगी नहीं।
अलविदा दोस्तों,
अलविदा इस प्यारे से चमन को,
समेट कर ले जा रहे हैं,
हम इस यादों के अंचल को।
आज विदाई की इस बेला में,
शब्द कम और आँखें नम हैं,
बिछड़ रहे हैं आज हम सब,
इस बात का भारी ग़म है।
दुआ है इस शिक्षा के मंदिर की,
साख यूँ ही जग में महके,
हम जहाँ भी रहें दुनिया में,
नाम हमारा इस कॉलेज से चमके।
हम चले जाएँगे छोड़ कर ये कॉलेज,
पर हमारी रूह यहीं रहेगी,
इन दीवारों से ये कहती रहेगी —
"अलविदा नहीं... फिर मिलेंगे"
अलविदा इस पावन आंगन को,
अलविदा इन दीवारों को,
RLSY कॉलेज से हम ले जा रहे हैं,
यादों के हज़ारों नज़ारों को।
झुककर प्रणाम करते हैं आज,
इस शिक्षा के मंदिर को हम,
जाते-जाते बस यही दुआ है,
ये रिश्ता कभी न हो कम।
रचनाकार- पल्लवी श्रीवास्तव
ममरखा, अरेराज, पूर्वी चम्पारण (बिहार)


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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