(बाल कविता)
इंद्रधनुष बन जाती कथरी
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खटिया पर बिछ जाती कथरी ।
अच्छी नींद सुलाती कथरी ।।
फटे-पुराने कपड़ों से ही
अम्मा सदा बनाती कथरी ।
गुल गुल, नरम, मुलायम, सुंदर,
सुखदाई बन जाती कथरी ।
धागे और सुई से सिल कर
नए रूप में आती कथरी ।
सतरंगे कपड़ों से मिल कर
इंद्रधनुष बन जाती कथरी।
जाड़े में कंबल जैसे ही
सर्दी दूर भगाती कथरी ।
निर्धन और धनी के घर में
रोज बिछाई जाती कथरी ।
भेद-भाव की बात न करती
सबका साथ निभाती कथरी ।
बच्चे बूढ़े और युवा की
सारी थकन मिटाती कथरी ।
दादी अम्मा जैसी सब पर
ममता प्यार लुटाती कथरी ।
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~राम नरेश उज्ज्वल


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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