"बिहार की मिट्टी"
गंगा की लहरों में इतिहास बहता है।
सोनपुर के मेले में सौदा नहीं, संस्कार बिकता है।
नालंदा की ईंटों में ज्ञान की आग जलती है।
बोधगया की शांति में बुद्ध की सांस चलती है।
चंपारण की धरती में गांधी बसता है।
बिहार की मिट्टी में क्रांति पलती है।
लिट्टी-चोखा में अपनापन लगता है।
सत्तू में मेहनत की खुशबू घुली है।
भोजपुरी में ठेठपन और मिठास है।
मैथिली में मिथिला की पहचान है।
मगही में मगध का गौरव बोलता है।
बिहार की बोली में दिल से दिल जुड़ता है।
तूफान आए, बाढ़ आए, सुखाड़ आए।
पर बिहार का हौसला कभी नहीं झुका।
छठ के घाट पर सूरज को सलाम मिलता है।
हर आंगन में मेहनत का दीया जलता है।
बेटा परदेस जाए, पर मिट्टी नहीं भूलता।
बिहार दूर रहे, पर बिहार दिल में बसता है।
लोग कहते हैं "बिहारी" कहकर ताना मारते हैं।
मैं कहती हूं गर्व से "हां बिहारी हूं"।
हमने आईएएस दिए, हमने वैज्ञानिक दिए।
हमने शेरशाह दिए, हमने आर्यभट्ट दिए।
हम झुकते नहीं, हम मिटते नहीं,
क्योंकि हमारी नसों में गंगा बहती है।
खेतों में धान की बालियां सोना उगलती हैं।
कारखानों में बिहार का पसीना ढलता है।
पटना की सड़कों पर जिद जिंदा है।
दरभंगा की मधुबनी में रंग बोलता है।
सीवान की मिट्टी में वीर कुंवर सिंह पलता है।
हर जिले में कोई न कोई इतिहास पलता है।
इसलिए जब कोई पूछे मेरी पहचान क्या है,
मैं सीना तानकर कहती हूं बिहार है।
ना सोना चाहिए, ना चांदी चाहिए।
बस बिहार की मिट्टी का तिलक चाहिए।
जहां जन्म लिया, जहां सांस ली,
वो ममरखा, अरेराज मेरा अभिमान है।
और अंत में इतना ही कहूंगी,
बिहार मेरा गौरव, बिहार मेरा स्वाभिमान।
इसकी धूल में भी देवताओं का वास है।
इसकी हवा में भी आजादी की सांस है।
जिसने जन्म लिया इस धरती पर,
वे दुनिया में सबसे ऊंचा है।
रचनाकार- पल्लवी श्रीवास्तव
ममरखा, अरेराज, पूर्वी चम्पारण (बिहार)


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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