अपने रंग में, तुम्हें रंगाऊं
तेरे रंग में,खुद रंग जाऊं
अब की बार, ऐसी होली मनाऊं
भर भर लोटा भंग घोलकर
जी भर तुम्हें पिलाऊं
जब चढ़ जाए नशा मस्ती का
मैं चलते बलखाऊं
हंसता जाऊं बिना हंसी आए
मनगढ़ंत सुनाऊं
तेरी नज़र से इस दुनिया को
खुद ही निहारे जाऊं
अब की बार, ऐसी होली मनाऊं
तेरे प्रेम का चटक रंग सब
मेरे मन में लग जाए
चाहे जितना जोर करूं मैं
छूटे नहीं छुड़ाए
लाली नीला हरा गुलाबी
मेरे गालों पे लगाए
तेरी उंगली की छुअन का फोटो
अपने दिल छपवाऊं
अब की बार, ऐसी होली मनाऊं
अपनी पांवों में बांध के घुंघरू
देखूं तेरी ता - ता-थैया
मैं बन जाऊं नटखटी राधा
तुम्हें बनाऊं भोले कन्हैया
ढोल नगाड़े मन में ही बाजे
नहीं बुलाऊं कोई बजैया
घुल जाओ तुम मेरे गीत में
ऐसा फाग सुनाऊं
अब की बार, ऐसी होली मनाऊं।।
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







