हो गया है अब रुपया भी गरीब मेरी तरह,
डॉलर है सबकी आंख का तारा तेरी तरह।
आया था तू बनके फ़रिश्ता बचाने को सफ़ीना,
तेरी मसीहाई में बह गया सब तिनके की तरह।
लुटेरों की नज़रों में रहा है बदनसीब ए वतन,
अपनों के हाथों भी लुट गया गैरों की तरह।
वतनपरस्ती की हवाएं इतनी ज़ोर से चली हैं,
कि तोड़ी जा रही हैं पतवारें तूफ़ानों की तरह।
अमीरों की होती है दुनियां सारी की सारी,
होता है वतन मुफ़लिस को घर की तरह।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







