कुछ लिखना चाहता हूँ,
फिर छोड़ देता हूँ।
हवाएँ इतनी जहरीली हैं
कि पढ़ने वाली आँखें
भी खुलने से डरती हैं।
कुछ कहना चाहता हूँ,
फिर चुप हो जाता हूँ।
एक शोर है,
जो हर आवाज़ से ऊँचा उठता रहता है।
होंठ खोलता हूँ तो
जहरीली हवा का झोंका
जीभ को जलाने को तैयार बैठा रहता है।
अब कहना कुछ शब्दों में होगा,
मेरे पास वो शब्द ही नहीं हैं
जिनमें कहना, सुनना और लिखना होगा।
शायद हवाओं का, उन पर असर कम हो।
मैं अब चुप ही रहता हूँ,
लेकिन मैं मौन नहीं हूँ।
अभी तक मैं सोचता हूँ,
हवाओं को इसका पता नहीं है।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







