आईना भी देखूँ तो सावन-सावन दिखता है
बड़ा निर्मल पवित्र,पावन-पावन दिखता है
मन का मौसम कुछ इस कदर बदला है
आज कल अब काला रंग भी हरा-हरा दिखता है
आईने में भी खूबसूरती नजर आने लगी है
हर तरफ खुशियों की हरियाली छाने लगी है
दिलकश अंदाज से छूती हैं कमसिन हवाएं
फिज़ाओं में भी शीतलता और नमी ही नमी है
आसमान से उतरती हैं बारिश की बूंदें
मन के कोना कोना, स्पर्श करने के लिए
सावन का महीना आया है घटा से बरसा है पानी
दिल चाहता है लिख दूँ अपनी खूबसूरत कहानी।।
-ममता तिवारी


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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