"अरेराज की गौरव-गाथा"
पूर्वी चंपारण का मस्तक, अरेराज की माटी,
जहाँ प्रवहमान भक्ति-रस की, पावन निर्मल घाटी।
कण-कण में है तेज समाया, कण-कण में इतिहास,
बाबा सोमेश्वर के धाम में, बसता स्वयं प्रकाश।
महंत शिवशंकर गिरी जी की, अमर रहे यह साधना,
धाम और शिक्षा-विकास की, पूरी की हर प्रार्थना।
ज्ञान-कर्म की पावन ज्योति, जिनसे हुई प्रदीप्त यहाँ,
अरेराज का कण-कण गाता, उनकी अमिट अमूल्य गाथा।
सोमेश्वर नाथ हाई स्कूल चमके, ज्ञान-दीप की पावन ज्योति,
संस्कृत स्कूल से महके विद्या, जहाँ संवरते भावी मोती।
मिडिल स्कूल से नींव मजबूत, विद्या का यह पावन धाम,
एम.एस.एस.जी. कॉलेज में गूँजे, हर होनहार छात्र का नाम।
पार्वती कन्या उच्च विद्यालय, नारी-शिक्षा का मान बढ़ाए,
बिटिया पढ़े, आगे बढ़े नित, नया सबेरा यहाँ सजाए।
उच्च शिक्षा के मंदिर से, सजता नया प्रभात,
अरेराज के होनहार युवा, गढ़ते स्वर्णिम कल की बात
बापू के सत्याग्रह की साक्षी, यह पावन सौगंध,
लोक-संस्कृति की खुशबू से, महके यहाँ सुगंध।
अनंत चतुर्दशी के मेले की, अपनी छटा अनूप,
समरसता और भाईचारे का, दिखता सुंदर रूप।
अनुमंडल का गौरव चमके, पावन न्यायालय-धाम,
न्याय-नीति की चौखट पर नित, होते पूरण काम।
सत्य, न्याय की निष्पक्षता से, मिटते सब जंजाल,
विधि की शीतल छत्र-छाँव में, जन-जन है खुशहाल।
लौरिया का अशोक-स्तंभ यह, युगों-युगों से महान,
ब्राह्मी लिपि के लेख सुनाते, मौर्य-वंश की शान।
शांति और अहिंसा का यह, पावन अद्भुत धाम,
बुद्ध के पावन पदचिह्नों को, कोटि-कोटि प्रणाम।
प्रखंड विकास पदाधिकारी आदित्य दीक्षित, श्रेष्ठ पदाधिकारी,
जन-सेवा के पथ पर जिनकी, निष्ठा है बलिहारी।
हर योजना को धरातल पर, लाते बिना विलंब,
अरेराज के प्रगति-चक्र का, बने मज़बूत स्तंभ।
गंडक की धाराओं से सिंचित, खेतों की हरियाली,
अन्नदाता के श्रम से खिलती, मुख पर नव-खुशहाली।
सावन और शिवरात्रि में जब, उमड़े भक्त-समाज,
गौरव से सब मिलकर बोलें— जय हो, जय अरेराज।
रचनाकार- पल्लवी श्रीवास्तव
ममरखा, अरेराज, पूर्वी चम्पारण (बिहार)


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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