ज़िन्दगी — अमानत है रब की
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अक्सर कठिन परिस्थितियों में हमें लगता है कि जीवन का कोई अर्थ नहीं रहा। समस्याएँ इतनी बड़ी प्रतीत होती हैं कि उनसे निकलने का रास्ता दिखाई ही नहीं देता। ऐसे समय में कुछ लोग मौत को समाधान मान बैठते हैं। लेकिन सच यह है कि मौत कभी किसी समस्या का हल नहीं हो सकती। परिस्थितियाँ चाहे जितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों, जीवन को जीने के हमेशा नए अवसर होते हैं। इंसान को चाहिए कि वह हार न माने, बल्कि हर बार खुद को संभाले और संघर्ष करे। ज़िंदगी को एक नहीं, हज़ार मौके दीजिए—क्योंकि हर नया दिन नई उम्मीद लेकर आता है।
जीवन के किसी भी मोड़ पर नई शुरुआत करना केवल आपके आत्मविश्वास को ही नहीं, बल्कि आपके जीवन के प्रति प्रेम को भी दर्शाता है। अगर ज़िंदगी आपकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रही, तो आप ज़िंदगी की उम्मीदों पर खरा उतरकर दिखा सकते हैं। क्योंकि ज़िंदगी भी आपसे वैसी ही उम्मीदें रखती है जैसी कि आप उससे रखते हैं।
रिश्तों की अहमियत अपनी जगह है, मगर यह भी सच्चाई है कि कोई भी रिश्ता ज़िंदगी से बड़ा नहीं होता। जबरदस्ती निभाए गए रिश्ते न केवल आत्मा को घायल करते हैं, बल्कि व्यक्ति के आत्मसम्मान को भी नष्ट कर देते हैं। ऐसे रिश्तों में ख़ुशी ढूँढना मूर्खता के अलावा कुछ नहीं।
ज़िंदगी आपको जिस रूप में भी मिले, उसे खूबसूरत बनाने का प्रयास पूरे दिल और ईमानदारी से करें। ज़िंदगी की कसौटी पर वही खरा उतरता है जो वास्तव में उतरना चाहता है। वरना मुक़द्दर पर रोने वालों की तो दुनिया में कोई कमी नहीं। याद रखिए ज़िंदगी से शिकायत करना आपके व्यक्तित्व की निर्बलता और आत्मविश्वास की कमी को दर्शाता है। यह आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप अपने व्यक्तित्व को क्या पहचान देना चाहते हैं कमज़ोरी या मज़बूती।जीवन में आने वाली चुनौतियों को सहर्ष स्वीकार करें, क्योंकि यही चुनौतियाँ हमें गढ़ती हैं। ये न केवल आत्मविश्वास को मज़बूत करती हैं बल्कि हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देती हैं।
सबसे अहम बात यह है कि ज़िंदगी हमारी अपनी नहीं, बल्कि उस रब की अमानत है। हमें इसका सम्मान करना चाहिए और कभी भी किसी के लिए इसे ज़ाया नहीं करना चाहिए। जीवन हमें मिला है किसी उद्देश्य से, और उसे अधूरा छोड़ देना उस अमानत के साथ नाइंसाफी है।
इसलिए चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, उम्मीद थामे रहिए, ख़ुद से प्यार कीजिए, नई शुरुआत करने का साहस रखिए, और अपने जीवन को सार्थक बनाने की कोशिश कीजिए।याद रखिए, अंधेरा चाहे कितना भी गहरा हो, सूरज हर सुबह उगता है और रोशनी हर बार लौटती है।
डाॅ फ़ौज़िया नसीम शाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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