आँगन-आँगन खुशियाँ बिखेरें,
उम्मीदों का उजियारा हो।
ऐसा ही पावन और सुंदर,
गांव शहर देश हमारा हो।
दीया बनाएं हम एक ऐसा,
जिसमें प्रीत की ज्योत जले।
प्यार से रोशन हो जहां,
नफ़रत का अंधेरा मिटे।
दिल में ख़ुशी के दीप जले,
हर दिल खुशहाल रहे।
हर आँगन में खुशियाँ,
आने के लिए बेताब रहें।
ख़ुशी हर घर में दस्तक दे,
और दिल खोलकर मुस्कुराए।
हर दिल में ख़ुशी के फूल खिले,
ग़म किसी घर में जगह न पाए।
दिल से दुआ यही,
जहान रोशनी से जगमगाए।
दीया बनाएं हम एक ऐसा,
जिसमें प्यार की ज्योत जले।
हवाएं चाहे जितनी भी तेज़ हों,
वो हर हाल में जलता रहे।
दीया बनाएं हम एक ऐसा,
जिसमें मोहब्बत की ज्योत जले।
नफ़रत की हर दीवार गिरे,
मिटे नफ़रत ज़माने से और,
दिलों में बस प्यार पले।
अंधेरा चाहे जितना हो,
पर हर दिल में उजाला खिले।
निराशा किसी को छू न पाए,
दिलों में आस और उम्मीद पले।
रोशन हो जाए हर एक कोना,
इस जहान का जब हम सभी,
मिलकर एक साथ दीप जलाएं।
अपनापन दिलों में घर बनाए,
और नफ़रत धरा से दफ़ा हो जाए।
हम सभी मिलकर हाथ बढ़ाएं,
इस धरती को स्वर्ग बनाएं।
अमन-चैन का दीप जलाकर,
हर चेहरे पर मुस्कान लाएँ
दीया जलाएं हम एक ऐसा,
बुराई उसी में राख हो जाए।
सच्चाई अच्छाई की घी तेल से,
सदा ही दीया मुस्कुराए।
दीया बनाएं हम एक ऐसा,
जिसमें प्रीत की ज्योत जले।
प्यार से रोशन हो जहां,
नफ़रत का अंधेरा मिटे।।
-ममता तिवारी


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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