युग युगांतर से जीवन का यही विधान है,
जिंदगी ही समस्या है और जिंदगी ही निदान है।
कभी प्रश्न बनकर मन की देहरी पर दस्तक देती,
कभी उत्तर बनकर आत्मा की शांति में खिलती।
कभी धूप की तरह चुभती है आंखों में,
कभी छाँव बनकर थके कदमों को थाम लेती है।
वह ही पीड़ा की गहरी नदी है,
और वही किनारे पर मिलता विश्राम है।
जिंदगी ही समस्या है और जिंदगी ही निदान है।
जब-जब मन ने हार मानने की सोची,
जिंदगी ने मुस्कान का एक दीप जला दिया।
अंधेरों की लंबी रातों के बाद
उम्मीद का नया सवेरा दिखा दिया।
वह ही संघर्ष का कठोर पाठ पढ़ाती है,
और वही हृदय में करुणा का फूल खिलाती है।
उसके प्रश्नों में ही छिपा उत्तर का बीज है,
उसके आंसुओं में ही भविष्य का अभिमान है।
जिंदगी ही समस्या है और जिंदगी ही निदान है।
युग युगांतर से जीवन का यही विधान है,
जिंदगी ही समस्या है और जिंदगी ही निदान है।
जो इसे समझ ले, वही जीवन का साधक है,
जो इसे जी ले, वही सच्चा इंसान है,
युग युगांतर से जीवन का यही विधान है ।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







