जहाँ रहते हो,
वहीं तो समय देते हो,
तो सत्य भी वहीं से लेते हो,
और वही सत्य,
तुम्हारे भीतर परिपक्व होता है,
तो सत्य परिपक्व होते हुए,
तुम्हें विज्ञान की नजरे देते हुए,
विश्वास प्रकट कर देता है,
विश्वास में ही प्रेम प्रस्तुति होते हुए,
अज्ञान ही ज्ञान की और बढ़ते हुए,
तुम ही एक कोने से प्रकाश कर देते हो,
क्यूँकि तुम जहाँ रहते हो,
वही जगह तुम्हारा समय,
बेघर से घर कर देता है,
जहाँ हो,
जहाँ रहते हो,
वही समय है,
सत्य भी वही का मिलेगा,
सत्य है तो उसमे विश्वास झाँकता है,
वही प्रेम तो तुम करते हो,
जहाँ तुम रहते हो।
जहाँ रहना है,
वहीं समय उद्दीप्त होता है,
समय देते ही,
प्रेम उत्पन्न होता है,
प्रेम सीमा से आगे बढ़ता समय,
विश्वास का विश्व बनाता है,
विश्व में विश्वास का धरातल,
विज्ञान के तथ्य प्रकट करता है,
तथ्य वो ही थे जो सत्य थे,
सत्य ही प्रेम था,
प्रेम ही विश्वास बना,
विश्वास में वास किया तो विज्ञान बना,
मगर अंधविश्वास में तुम ने वास किया,
ना प्रेम किया ना उसमे रहे,
ना समय उसके भीतर जाने दिया,
समय नहीं दिया, ना रहे उसमे,
तो सत्य ना पनपा,
सत्य नहीं हुआ तो ज्ञान नहीं आया,
तो अज्ञान रहा,
तो नहीं देखा तो अंधविश्वास बना,
विश्वास से ज्ञान बना,
ज्ञानी बन तुम आगे बढ़ गए,
तो जहाँ रहते हो,
वही से सब कुछ कहते हो,
और जो कहते हो,
वही व्यवहार में रहते हो,
उस व्यवहार की व्यवस्था में,
रिश्तों की जगह तय करते हो,
जहाँ तुम रहते हो। ।
किसी जगह रहना ही सत्य है,
आप वही हो जहाँ आप हो,
रहना ही सत्य, सत्य ही समय, समय ही प्रेम, प्रेम ही विश्वास, विश्वास ही विज्ञान, विज्ञान ही ज्ञान, ज्ञान ही निवेश, निवेश ही व्यवहार, व्यवहार ही गति, और गति में आप, आप वही जहाँ आप थे। ।
- ललित दाधीच। ।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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