अगर किसी के काम न आया
तो ये जिंदगी क्या जिंदगी है
अभी नहीं है तुम्हें ये फुर्सत
कि पढ़ लें अपनी क्या जिंदगी है
फिज़ा महकती है जिसकी दम पर
वो फूल कुछ भी कहीं न मांगा
जो टूटकर भी यूं मुस्कराना
बिखर बिखरकर बता रही है
तुम्हें मिली है जो कामयाबी
नहीं कभी वो सदा रहेगी
मगर लुटाया जो दूसरों पर
सदा रहेगी सदा रही है
क्या वृक्ष अपना खा लेते फल है
क्या नदियां अपनी पी लेतीं जल हैं
परोपकारी ही जिंदगी है
हमें ये कुदरत सीखा रही है
सदा ज़िगर में उन्हें बसाते
धरम करम जो सही निभाते
यही कला है यही खुशी है
कथा अतीत की बता रही है।।🪔।।
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







