Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas MishraThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

याद है तुमको? (नज़्म)

याद हैं तुमको (नज़्म)

पुराने कसमें-वादे, बीती बातें याद हैं तुमको?
मोहब्बत की वो मीठी-मीठी बातें याद हैं तुमको?

वो डायरी याद है जिसमें हमने अपने ख़्वाब लिखे थे?
किताब-ए-दिल से फाड़कर कुछ हमने बाब रखे थे
(बाब: Chapters)

क्या वो छत याद है जिसमें साथ में पतंगे उड़ाईं थीं
या वो नदी, किनारे जिसके हमनें कसमें खाईं थीं
वो दिन क्या याद है जब हम तुम मिले थे उस बग़ीचे में
पूरी शाम बीती थी वहां पेड़ों के नीचे में

वो सूरज याद है , जिसके मध्यम होते ही
तुमने घर जाने को बोला था
वो तारे याद हैं, जिनको आसमां से
तुमने उतर जाने को बोला था

वो रातें याद हैं, जब दोनों अपनी-अपनी छत पे सोते थे?
और तारों को तकते थे, अनहोने ख़्वाब बोते थे
वो तारे जैसे किसी क़ासिद के जैसे काम करते थे
हमारे पैग़ाम कैसे एक दूसरे के नाम करते थे

वो चोरी से मुझे घर में बुलाना याद है तुमको
पुराने किस्से हँस-हंसकर सुनाना याद है तुमको
कभी पर्दे के पीछे छुपकर मुझे चुप-चाप से तकना
वो फूलों का अपने किताबों में फिर रखना

इसी तरह की वो छोटी-छोटी निशानियाँ
दर रोज़ की अपनी मोहब्बत की कहानियाँ
झूठे-मूठे वो सारे बहाने याद हैं तुमको
मोहब्बत के वो सब मौसम सुहाने याद हैं तुमको

तुम्हारा मेरे कांधे पर वो सर रखकर कि सो जाना
वो तेरा सोते-सोते मीठे ख्वाबों में खो जाना
मेरा तुझे वो फिर यूं हौले से जगा देना
तेरी ज़ुल्फ़ों पे हाथ फेरकर उनको सजा देना
तेरा वो प्यार से मेरे माथे को चूमना
पकड़कर हाथ मेरा वो तेरा फिर वहीं घूमना

मुझे सब याद है, तुझसे वाबस्ता सारी बातें वो
जो सच में हो, या ख्वाबों में सारी मुलाकातें वो।

अनमोल




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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (3)

+

सरिता पाठक said

अनमोल ji aapki रचनाएँ bhi बहुत अनमोल होती हैँ अति सुन्दर 👌आपको सादर प्रणाम 🙏

Lekhram Yadav said

याद दिलाने के लिए शुक्रिया जनाब, बहुत खूबसूरत रचना आपको सादर नमस्कार

रीना कुमारी प्रजापत 'मनस्वी' said

लाजवाब बेमिसाल

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