साथ सदा किसका रहा, जग में कौन समान।
आज मिला जो प्राण सा, कल बन जाए अनजान॥
आज तुम्हारी बात पर, जिसकी ढलती शाम।
कल वह तुमको भूलकर, पूछे नहीं नाम॥
रिश्ते हैं जल-बुलबुला, पल में टूटे तीर।
किसका अपना कौन है, जाने जग की पीर॥
लोग बदलते देखिए, बदले उनके भाव।
कभी समय के फेर से, कभी स्वार्थ के घाव॥
जो छूटा उसको छोड़ दे, मत कर मन में शोक।
जीवन रुकता कब भला, रुक जाए जब लोक॥
अपने भीतर दीप रख, चाहे घिरा अँधियार।
साथ छूट जाए अगर, राह दिखाए प्यार॥
इतना दृढ़ बन जाइए, टूटे नहीं विश्वास।
दूजे के दुःख में फिर भी, भीगे अपना श्वास॥
चलना अकेले सीख ले, मन में रख विश्वास।
भीड़ बहुत हो चारों ओर, फिर भी न हो उदास॥
आया जो उसका मान कर, जो जाए दे राह।
बंधन में मत बाँधिए, जीवन की यह चाह॥
चलना ही जीवन हुआ, रुकना केवल हार।
अपने सच के साथ चल, यही जगत का सार॥
कोई सदा ना साथ है, न कोई सदा ही दूर।
क्षण-क्षण बदलत संसार, यही सत्य भरपूर॥
अपने बल पर जी सको, मन में रहे उजास।
कोई आए, कोई जाए, तुम मत छोड़ो श्वास॥
साथ मिले तो मानिए, जीवन का उपहार।
छूटे साथ तो सीखिए, खुद बनना पतवार॥
डॉ. अखिलेश श्रीवास्तव


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







