शरद पूर्णिमा बन जाऊंगी
तुम चंदा बन कर आ जाना।
रात ओस की बूंदों से कलियों
पर लिखती नाम तुम्हारा।
ठंडक बन कर लिपट जाऊंगी,
जाड़े का मौसम बन आना।
मोती चुगें प्रेम के संग-संग,
प्रणय झील में संग नहाऐं,
मैं वो हंसिनि बन जाऊंगी,
तुम हंसा बन कर आ जाना।
यादें खुशबूदार तुम्हारी,
हर मौसम में महका करतीं।
मैं बरखा ऋतु बन जाऊंगी,
तुम बन मेघ बरसने आना।
शरद पूर्णिमा बन जाऊंगी।
तुम चंदा बन कर आ जाना।
गीतकार अनिल भारद्वाज एडवोकेट हाईकोर्ट ग्वालियर
@सर्वाधिकार सुरक्षित रचनाकार


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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