वो आँखें ढूँढ़ती हूँ माँ,
जो मेरा दर्द खुद में समेट लिया करती थीं।
वो हाथ ढूँढ़ती हूँ माँ,
जो मेरे तकलीफ़ में होने पर मुझे थाम लिया करते थे।
वो गोद ढूँढ़ती हूँ माँ,
जिसमें सर रखकर सुकून से सो जाया करती थी।
मुझे यूँ अकेला छोड़कर क्यों चली गयीं माँ।
जी चाहता है भगवान से वापस ले आऊँ तुम्हें,
और छुपा लूँ अपने आँचल में।
कल तक मुझे गले लगाती थीं आप,
आज मैं गले लगा लूँ तुम्हें।
जिस तरह मेरी हर ख़्वाहिश पूरी की थी आपने,
आज तुम्हारा हर अरमान पूरा करना चाहती हूँ मैं।
आज तुम्हें गले लगाने को जी चाहता है।
वैसे तो एक पल भी भूली नहीं तुम्हें,
तुम्हें याद कर आँखें भर आती हैं मेरी।
तुम खो गयी हो आसमाँ में कहीं,
अब तुम्हारी यादों को दिल से लगा कर रखा है मैंने।
आपकी यादें ही तो हैं माँ,
तुम्हारी परछाई।
— सरिता पाठक
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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