खुदा है या नहीं है महज़ इस बात पर बहस जारी है
ईश्वर की फ़रमान पर तो मौलाना मुफ्ती का अमल नहीं है
कुरान की मानी समझा देना ईमान की की पहचान नहीं है
नमाज़ पढ़ना अच्छा इंसान होने की अलामत हरगिज़ नहीं है
कायनात वो मखलुकात को जन्म दिया उसका नाम लेना है
खुदा खुदा,ईश्वर ईश्वर,GOD GOD चिल्लाने से राज़ी नहीं होता
इंसानी ढांचा में इंसानियत लाना ये अहम फ़रमान है उसका
दिल दिमाग ही कहता है कि मेरा जन्म दाता कोई है यूहीं नहीं
साइंस दिमागी उपज है यही दलील काफ़ी है खुदा होने का
क्या अच्छा और ख़राब है साइंस नहीं बलिके दिमाग कहता है
दुनियां में किसी मुफ्ती,पादरी वो पंडित का फतवा नहीं मानते
जिसमे इंसानियत, ईमानदारी सच्चाई पर अमल हो उसे मानता है
वसी अहमद क़ादरी
वसी अहमद अंसारी
मुफक्किर ए कायनात
मुफक्किर ए मखलुकात


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







