मस्ती के आलम में वक्त बदल गया।
कश्ती वही पुरानी राही बदल गया।।
ना सकल बदली ना किरदार बदला।
बस देखने का नजरिया बदल गया।।
नज़र पड़ते ही ठहर गई जब उसकी।
धूप-छाँव से 'उपदेश' दिन बदल गया।।
बिना कहे ही अंतर्मन भावुक हो गया।
नज़र की अदला-बदली में बदल गया।।
नज़र फ़ेर लेने की गुंजाइश जाती रही।
किस मेहरबानी से मौसम बदल गया।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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