वो अपनी आंखों में तूफान सजा रखा है
और पलकों पर, आसमान उठा रखा है।
बाजुओं को अपनी खुली छूट देकर
इरादों में उड़ने का अरमान बना रखा है।
उतरता है मैदान में,लोग नजरें उतारते हैं
जैसे, अपनी दीदार का मैदान सजा रखा है।
थकना नहीं है,आराम भी नहीं करना है
सफर को ही अपना मुकाम बना रखा है।
लगता है, मंजिल उसे, स्वयं तलाश रही है,
जुनून, उसके कदमों में,मकान बना रखा है।
"सूर्यवंशी" का"वैभव" सदा चमकता रहे
उसने अपने दिल में हिंदूस्तान बसा रखा है।
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







