जितनी बार पानी पीते
उतनी बार पीयूष पी न सकते
क्योंकि पियूष से ज्यादा स्वाद पानी में है
धरा से जो जन्म लेता है वही स्वाद
और पवित्र होते हैं ॥

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Show your love with any amount — Keep Likhantu.com free, ad-free, and community-driven.
The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
जितनी बार पानी पीते
उतनी बार पीयूष पी न सकते
क्योंकि पियूष से ज्यादा स्वाद पानी में है
धरा से जो जन्म लेता है वही स्वाद
और पवित्र होते हैं ॥
© 2017 - 2026 लिखन्तु डॉट कॉम