कब ठहरती हैं निगाहें
लाख छुपाया फिर भी ये, कहां छुपती हैं निगाहें
बचा नहीं जिससे कोई वो जादू करती हैं निगाहें
ठहर जाता है वक्त भी इन निगाहों को देखके
वक्त, कैसा भी हो यहां, कब ठहरती हैं निगाहें
लगा देती हैं निगाहों पर, अक्सर पहरा पलकें
मगर, उठते ही ये पहरा, बदल जाती हैं निगाहें
गर हो जाएं ये बोझिल खुशी और गम से कभी
तब बादल की तरह खुल कर बरसती हैं निगाहें
गर हो जाएं टेढ़ी तो, बचना मुश्किल है इनसे
होश आए न कभी असर ऐसा करती हैं निगाहें
लाख कोशिश करे कोई, इन निगाहों को छुपाने की
यूं ही, होती नहीं मेहरबां, किसी पर यह निगाहें
वो खुश किस्मत है जिस पर मेहरबां हों निगाहें
इन निगाहों से निकलती है प्रेम की गंगा यादव
ये खुशी पाने के लिए अक्सर तरसती हैं निगाहें
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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