विषय - एक अजनबी का छाता
विधा -कविता
शीर्षक - अजनबी और छाता
छाता हो या अजनबी,
वक्त पर काम तो आ ही जाते हैं।
कभी बारिश में तो कभी मुश्किल में,
यही तो है जो उस पल काम आते हैं,
कभी सोचना छाते का महत्व ,
काम तो आता है।
कभी धूप में राहगीर बनकर,
कभी सफ़र में अजनबी बनकर,
बारिश बरसात की हो या मेरा, अंतर्मन की भीगना तो है।
साथ उस वक्त पर तो,
अजनबी का होना तो बनता है।
Neetu
छाता हो या अजनबी,
वक्त पर काम तो आ ही जाते हैं।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







