हंसता मुस्कुराता एक दीया,
चुपके से कानों में कहता है।
भले ही छोटा सा दीपक हूँ,
पर घने अंधेरों से टकराता हूँ।
जलता रहता हूँ रात भर,
तनिक नहीं घबराता हूँ।
धरा से तिमिर मिटाकर,
उजालों का उपहार देता हूँ।
ना थमना मुझे आता है,
ना रुकना मुझे आता है।
ना हारना मुझे आता है,
ना भागना मुझे भाता है।
दृढ़ता से अंधकार को,
परास्त करना मुझे आता है।
डर जाता है तमस धरती का,
मेरे हौसलों को देखकर।
हारूंगा न मैं कभी,
देता हूँ ये लिखकर।
मेरे हौसलों की गूंज से,
सर्वत्र उजाला होता है।
मेरे आगमन से,
तिमिर धरा का मिट जाता है।।
-ममता तिवारी


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







