मंज़िल न सही 'उपदेश' तुम मिल जाते।
हर दर्द तुम्हारी बाहों में घुल मिल जाते।।
प्रेम का स्वाद चखते और इठलाते हम।
खुदाई के शुक्रिया में बेहद पिघल जाते।।
शिद्दत से भाग्य बनाते तुम मरहम लगाते।
प्रेम का स्वाद शहद जैसा मिलकर पाते।।
दाल में नमक की तरह तकरार ग़र होती।
चुंबन की झड़ी से खुशनुमा माहौल बनाते।।
पीछे से कसकर पकड़ते आशिकी चलती।
चटपटे किस्सो में ज़माने का मखौल उड़ते।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







