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Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

तुम चोर हो या कोई और - सुप्रिया साहू

मेरे दिल को धड़काने वाले,
मेरे एहसासों को जगाने वाले,
समंदर जितनी गहराई में,
सिर्फ तुम्हीं हो रहने वाले,
ज़रा बताओ तुम कौन हो,
तुम चोर हो या कोई और...।।

सुबह उठते ही तेरा ही ख्याल आने वाले,
हर समय जुबां पर रहने वाले,
हवाओं में लिपटकर सांसों में समा जाने वाले,
ज़रा बताओ तुम कौन हो,
तुम चोर हो या कोई और...।।

भीगीं बरसात में मेरे संग भींगने वाले,
भींगते ही सर्दी-जुखाम हो जाने वाले,
प्यार से गुस्सा दिलाने वाले और,
गुस्सा दिलाके गुस्से से मनाने वाले,
सबकी परवाह करने वाले,
ज़रा बताओ तुम कौन हो,
तुम चोर हो या कोई और...।।

मैं तपती धूप में तेरा इंतजार करती हूँ,
तू आए हवा बनके कुछ ऐसा सोचती हूँ,
गुजारती ही दिन सिर्फ तुझे याद करके,
अब ढलती है शाम मेरी,
आंखों में चेहरा दिख जाने से,
एक तेरा ही आवाज़ सुन,
दिल को सुकून मिल जाने वाले,
ज़रा बताओ तुम कौन हो,
तुम चोर हो या कोई और...।।

- सुप्रिया साहू




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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (4)

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रीना कुमारी प्रजापत said

हर किसी को जिंदगी में एक ऐसा खास ज़रूर होता है सुप्रिया जी जिसके नाम से ही हर काम शुरू होता है...सुबह,शाम, रात, खाना पीना, हर काम जिसके नाम से शुरू होता है हर पल जो याद आता है... वो चोर तो नहीं होता है बस सबसे खास होता है....जिंदगी का सबसे खूबसूरत एहसास होता है..बहुत बढ़िया 👍👍

सुप्रिया साहू replied

दिल से अनंत धन्यवाद दीदू 🥰, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

Lekhram Yadav said

वो चोर है या कोई और ये तो सुप्रिया जी ही जाने, मगर रचना बहुत ही लाजवाब है, आपको सादर नमस्कार।

सुप्रिया साहू replied

बहुत बहुत आभार एवं तहेदिल से आपका धन्यवाद सर 🥰, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

तुलसी पटेल said

बहुत खूब 👏🏻😊

सुप्रिया साहू replied

बहुत बहुत आभार एवं तहेदिल से आपका धन्यवाद तुलसी जी 🥰, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

प्यार से गुस्सा दिलाने वाले और गुस्सा दिलाके मनाने वाले ।वो तो चितचोर है, और कोई नहीं। कविता में एक मीठी मीठी शरारत, दिलों की नजाकत, मासूम मोहब्बत सारी बातें गुलदस्ते की तरह सजायी गई है। क्या बात है, सुप्रिया जी,सादर प्रणाम 🙏🌹

सुप्रिया साहू replied

इतनी प्यारी समीक्षा के लिए आपका दिल से हार्दिक धन्यवाद मनोज सर 🥰🥰, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

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