लिखने को जब मन किया
कलम ने ही हमेशा साथ दिया
कहीं और दिल लगता नहीं है
लिखने को ही दिल करता है
"कलम"
जब-जब फुर्सत पाती हूँ
मैं दिल से तुम्हें उठाती हूँ
तुम्हारे खुशबू भरी
स्याही को पन्नों पर बिखराती हूँ
दिल ने तुम्हें पसंद किया
इस बात से मैं इतराती हूँ
कौन है ऐसा जग में जो
उलझनों से मुक्त कर दे
तू ही वह शक्ति है तुम्हें
पाकर मैं इठलाती हूँ
तुम्हें देखे बिना एक पल
भी नहीं रह पाती हूँ
तुम्हें छू कर खूबसूरत
एहसासों में डूब जाती हूँ
सागर से शब्दों के मोती चुरा
भावनाओं की स्याही से सजाती हूँ
तुमसे गुफ्तगू करके
हर गमों से परे खुद को पाती हूँ
तुम्हें अपने दिल में बसाकर
अपनी सांसों को महकाती हूँ
कलम तू मेरे मन से चलती है
सोचकर मैं खिल जाती हूँ
कुछ भी लिखने को जब मन करता है
हर लफ्ज़ पर दिल तुम्हें याद करता है
तू रूह को सुकून देती है
“कलम”
तू मेरी दोस्त और सहेली है।।
-ममता तिवारी


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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