"थोड़ी देर ही सही,
तुम दिख जाया करो,
अपने सीने से तुम भी बाहर आया करो,
दिल में ऐसा क्या रखूं जो तुम्हारा हो,
पल भर से है जो रिश्ता वो दुबारा हो,
ऐसा क्या लिखूँ जो तुम मन में पढ़ो,
अपनी धड़कनों से कह दो,
मेरे दिल से मिलने को तुम आगे बढ़ो ,
ये दिल है,
इस दिल को बस बाहें मिले,
अपनी जान की धड़कने तब सीधा दिल से मिले,
बाहें होती दिल की,
ये बेमिसाल खबर कमाल होती,
मेरी दिल की धड़कने उनके पास होती,
हम दोनों की ख़बर तब बेख़बर ही होती है,
हाल ऐसा है कि मालिक ने किया ना असर,
पहले उनको ढूंढो,
फिर छुपते हुए उनको देखो,
फिर उनसे नजरे मिले,
पर दोनों नज़रों में वो जुड़ता रस्ता मिले,
फिर कहानी में आना जाना हो,
फिर पास बैठे,
फिर जुबानी खुले,
दोनों की बातें बने,
कोई उलझन में ना,
कोई फुर्सत ना हो,
तब थोड़ा सिर का बोझा कम हो,
थोड़ा खुलकर बोले,
शरीर के तब अंग अंग ढीले,
हल्का होता दोनों का मन,
तब पास आए,
दोनों की बाहें खुले,
सीने में दिल जगे,
फिर दीवानापन,
बढ़ते बढ़ते,
गले मिलते,
सारी दुनिया जैसे इन साँसों के बीच,
जो गर्मोंहवा का जो वक़्त निकला,
हम दोनों को तब एक ही धागा मिला,
जिसमें पिरो दी हमने,
सारी दुनिया की रीत,
सारी दुनियां थम गयी जब मिलते हैं प्रीत,
इसके बाद दिल से दिल मिले,
प्रेम के गाते गीत खुद वक़्त गाने लगा,
दोनों प्रेमी खामोशी में,
फिर गुमनामी में निकले,
इसलिए बाहें होती दिल की,
तो ग़ज़ब होता,
तब धड़कनों से मिलना जब जब होता,
सीने की जुबानी में दिल हरदम होता,
जब दो दिल जाते प्रेमी नगर,
तब साँसों से दम ना, बस दिल निकले।।"
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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