""दर्द ए दिल दरिया में डूब गए तो मिटाने आए हो,
खुद चलकर आए हो कि किसी के चलन से आए हो,
हाथ ना आया कुछ तो किसी दिलासे से आए हो,
फैला कर रख दोगे चाहतें, हक़ीकतें मिटाने आए हो
चेहरे में नूर हिस्से में चेहरे छुपाकर आए हो,
कि जैसा नजर आ जाऊंगा,
वैसा घूंघट लाए हो,
करवट ले लोगे नजरों की,
किस असलियत से आए हो,
जो रखना चाहते हो,
वैसा चेहरा चाहते हो,
मुझे घूर कर दूर तक ले जाने आए हो,
जहां अंतिम पहुंच पर ना मिलूं,
वहां से आगे पहुंचाने आए हो,
तो थोड़ी देर यहीं चुप रहकर खड़े रहो,
वही अपनी खुदगर्जी में हो जाएगा,
जो तुम यहां करने आए हो।।""
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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