जो न था, मेरी बात का वही मतलब तलाश रहे..
इंसानियत पे खरा उतरा तो, मजहब तलाश रहे..।
इश्क़–ए–वफ़ा, मुकद्दर से परे की बात थी मगर..
यकीं–ए–दिल की खातिर, बे–सबब तलाश रहे..।
मेरे इल्म की दुनिया की हद, पास ही नज़र आई..
मुहब्बत की ग़ज़ल कहने का, अदब तलाश रहे..।
दुनिया थी कि मैं खुद था, मता-ए-गिराँ* मालूम नहीं..
कभी यहां कभी वहां, सलीका–ए–तरब** तलाश रहे..।
किस–किस कूचे पर हम, रौशन–ए–शमा करते..
मेरे कुछ अहबाब देखिए, दियार-ए-शब तलाश रहे..।
* बहुमूल्य वस्तु
** खुदा को जानने का तरीका
पवन कुमार "क्षितिज"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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