तू ना होता खुदा तो लोग किसका बहाना बनाते,
हर मंदिर मस्जिद देवालय से सम्पत्ति कैसे बनाते,
लड़ते नहीं कम से कम इतनी लाशें ना बिछाते,
स्वर्ग नर्क ख्वाब सपने सब धरती पर बाग बन जाते,
लोग जीते जिंदगी किसी की मेहनत को दीमक ना खाते,
हर देश को योग्य शासक प्रशासन मिल जाते,
लोग किसी के काम का मज़ाक न बनाते,
जातिभेद धर्म लिंग भाषा रंग रूप का उपहास ना कर पाते,
स्त्री पुरुष में कोई रूढ़ि मनभेद मतभेद ना कर पाते,
इंसान के चेहरे इंसान रह जाते,
आसमान जमीन के बीच हर इंसान सुकून तो पाते,
मौत तो आखिरी सीढ़ी थी जिन्दगी की तेरे ना होने से ये पहले बच तो जाते,
तू खुदा है उससे ज्यादा तू क्यूँ खफा है,
तुझे मनाने ही ये भूखे ही मर जाते।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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