अपना ना लिखूँ तो क्या लिखूँ,
काग़जों की सतह पर अपना प्यार ना लिखूँ,
तो क्या लिखूँ,
सुबह शाम अपना इंतकाम ना लिखूँ,
तो क्या लिखूँ,
शब्दों से सभी भाव ना लिखूँ तो क्या लिखूँ,
अपने ही जुनून से लड़कर खुद का इंसाफ ना लिखूँ,
तो क्या लिखूँ,
चोरी छिपे रात दिन अपना इन्तेहा ना लिखूँ,
तो क्या लिखूँ,
आत्म में सुलगकर अपने मौन को ना लिखूँ,
तो क्या लिखूँ,
इज़्ज़त के सहारे अपने अस्तित्व से उलझकर,
अपने मैं के भेष को ना लिखूँ तो क्या लिखूँ,
छोड़ भी दूँ कलम को तो इसका कारण ना लिखूँ,
तो क्या लिखूँ।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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