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Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

शून्य हो गयी हूँ

शून्य हो गयी हूँ मैं,
अपनों की भीड़ में कहीं खो गयी हूँ मैं।
खुद से भी अजनबी हो गयी हूँ मैं।

हज़ारों ख़्वाहिशें, उम्मीदें जन्म लेती रहीं,
मरती रहीं।
कभी हो न सकी वो पूरी,

जो मिला उसी में खुश हो लिये,
ज़िंदगी गुज़र गयी इसी तरह पूरी।
उलझनें ज़िंदगी की सुलझ न सकी,

गाँठें इतनी थीं गहरी कि खुल न सकी।
कभी खुद को भी इंसाफ़ दिला न सकी,
कभी अपने लिये मैं लड़ न सकी।

सोचा था उसको न्याय दिलाऊँगी ज़रूर,
उसके लिये मैं लड़ूँगी ज़रूर, उसके लिये भी मैं कुछ कर न सकी।

वक़्त के हाथों हो गयी मजबूर, आज मैं ख़ामोश हो गयी हूँ।

अब शून्य हो गयी हूँ मैं,
ज़माने की भीड़ में कहीं खो गयी हूँ मैं।
शून्य हो गयी हूँ मैं।

— सरिता पाठक


यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है


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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (6)

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सत्यवीर वैष्णव said

बहुत अच्छा शानदार लिखती हो आप सरिता जी
जो मिला उसी में खुश हो लिये,
ज़िंदगी गुज़र गयी इसी तरह पूरी।
उलझनें ज़िंदगी की सुलझ न सकी,

गाँठें इतनी थीं गहरी कि खुल न सकी।
कभी खुद को भी इंसाफ़ दिला न सकी,
कभी अपने लिये मैं लड़ न सकी। बहुत अच्छा

सरिता पाठक replied

धन्यवाद सत्यवीर जी 🌹🙏

जयश्री विलास जोधंळे said

बहुत ही सुदंर रचना सरिता जी वक्त के हातों इनसान मजबुर हो जाता है दुसरे के लिए तो क्या खुद के लिए भी लडना भुल जाता है और कभी कभी खुद लडना नही चाहाता है क्योकी जिदंगी वो नैराष्य की ओर जाता है

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

वाह!! सरिता बहन, क्या खूबसूरत रचना लेकर आयीं हो। शून्य हो गई हूं मैं। जिम्मेदारियों को बखूबी निर्वहन करते करते खुद का ख्याल ही नहीं रहा। सबके लिए लड़ते लड़ते स्वयं के लिए कुछ भी हासिल करने की इच्छा नहीं हुई। त्याग, समर्पण और तपस्या से सिंचित आपकी ये कविता अतिसुंदर भावपूर्ण है।🙏🙏

सरिता पाठक replied

धन्यवाद भईया जी 🙏🌹

पवन कुमार "क्षितिज" said

अद्भुत, आपने तो भावों की सरिता ही बहा दी आज की रचना में.. उम्दा 👌👌👌👌

सरिता पाठक replied

धन्यवाद भईया जी 🙏🙏

सुप्रिया साहू said

जब ख्वाहिशें पूरी न हो तो उम्मीदें मरने लगती है और हम दूसरे तो दूसरे अपने लिए भी नहीं लड़ पाते, कोशिश करते करते शून्य हो जाते हैं, ये वक्त ही हमें लाचार बना देती है,बहुत खूबसूरत रचना मैम 👌👌, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

सरिता पाठक replied

धन्यवाद बहन 🌹🙏

रीना कुमारी प्रजापत said

बहुत बढ़िया...

सरिता पाठक replied

धन्यवाद 🌹❤️

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