मुझे ऐ दिल तू ले चल शराबख़ाने में
ज़रा मैं जाऊं संभल शराबख़ाने में
बड़े दिनों से ये दिल उदास बैठा है
खिलेगा अब ये कमल शराबख़ाने में
तू ढूंढेगा कहां मुझे ज़माने में
यहीं मिलूंगा कल शराबख़ाने में
ये बात मेरी तो मान और चल तू भी
कि जाएगा जी बहल शराबख़ाने में
बहुत मिलेंगे जो सुख़नवर वहां होंगे
लिखी है हमने ग़ज़ल शराबख़ाने में
ये है जगह नशे में जो मस्त रिंदों की
तू तन्हा यूं न टहल शराबख़ाने में
ज़रा कदम को संभालो तुम यहां अपने
कहीं न जाये फिसल शराबख़ाने में
जगह बुरी नहीं है ये जान लेगा फिर
कभी गुज़ार तू पल शराबख़ाने में
ऐ दिल ज़रा तो तू काम सब्र से ले अब
तू इस तरह न मचल शराबख़ाने में।
अनमोल


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







